सपनों की उड़ान भरने के पंख
https://www.atarman.com/hi/post/how-to-live-a-balanced-life स्वरांगी साने अपने रिश्तों, भागीदारी और बातचीत में संतुलन रखिए। यह तब होगा जब आपका दिमाग और आपका शरीर एक समन्वय में काम कर रहा होगा। यदि आपको मानसिक या शारीरिक थकान नहीं होगी तो ही आप जीवन के अन्य क्षेत्रों में बखूबी काम कर पाएँगे। कई बार हम जो पूर्व निर्धारित नहीं हैं उस घटनाक्रम के होने की कल्पना मात्र से डर जाते हैं। अज्ञात का भय हमारी ऊर्जा को खींच लेता है। दिमागी तौर पर अपने विचारों को लेकर स्पष्ट रहिए और नए विचारों के स्वागत के लिए तैयार रहिए। जब आपकी कोई आलोचना करता है तो हमेशा उस पर सोचने की या प्रत्युत्तर देने की ज़रूरत नहीं है। जिस वजह से बिन माँगी सलाह मिल रही है उसे लीजिए और आगे बढ़िए। आपके दिलो-दिमाग में जो भी चल रहा है उसे सबके सामने रखने से हिचकिचाइए नहीं। इस विचार से बाहर निकलिए कि आपकी आलोचना होगी। आलोचना होगी तो होगी, तेनु की...इस विश्वास को जगाइए। नए अवसर तभी सामने आते हैं जब आप नया करने को तैयार होते हैं और कुछ नया करते हुए प्रशंसा ही नहीं, आलोचना भी होगी ही, उससे क्या डरना? एक विचारधारा कहती है कि...