संदेश

जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुनिया की दुनिया किस्सा 12 https://www.atarman.com/hi/post/muniya-ki-duniya-kissa-12

चित्र
  मुनिया की दुनिया 5 stars 4 stars 3 stars 2 stars 1 star 5 RATING, 1 REVIEWS  Swaraangi Sane   कहानी-कविता संग्रह    जनवरी 25, 2022       पठन सूची में जोड़ें किस्सा 12 उसकी दीदिया (दीदी) ने इतनी तेज़ आवाज़ में कहा कि पूरी इमारत को सुनाई देने के लिए काफी था…मुनिया नाराज़ है। …और मुनिया गलियारे में लिफ्ट के पास जाकर हमेशा की तरह खड़ी हो गई, मुँह फुलाए।  फिर ऑफ़िस जाने वाले अंकल-आन्टी, कॉलेज जाने वाले भैया, स्कूल जाने वाली दीदी, मंदिर जाने वाली चिंटू की दादी..सभी उससे पूछते हैं, क्या हुआ-क्या हुआ।  मुनिया लिफ्ट, कॉल करने से उसके आने तक का हिसाब जानती है, और लिफ्ट किस फ्लोर से आ रही है उस हिसाब से किसी को तपाक से, किसी से थोड़ी नानुकर के बाद अपनी नाराज़गी का कारण बता देती है…अपने काम से जाने वाला हर शख्स उससे वादा करता है कि वह उसकी समस्या निपटा देगा। कोप भवन न सही, लिफ्ट से सटा वह कोना मुनिया के गुस्से का भाजन भले ही बनता हो लेकिन मुनिया के पूरे फ्लोर से मिलने वाले लाड़ का भी अकेला साक्षी होता है… कोई उसे वहाँ खड़े होने से मना करता ह...
चित्र
 

बदलाव की प्रक्रिया

  https://epaper.jansatta.com/c/ 65726944 जनसत्ता के संपादकीय पन्ने से, आभार के साथ... बदलाव की प्रक्रिया स्वरांगी साने जीवन में अवसर सभी को मिलता है। अवसर पर समय रहते ध्यान देने की ज़रूरत है। ध्यान आप किस तरह दे पाएँगे? तो जब ध्यान देना आपकी आदत में शामिल होगा। हमें जिस चीज़ की आदत होती है, वो काम हम बखूबी करते हैं, उसके लिए अलग से सोचना नहीं पड़ता। जिस रास्ते से आप रोज़ अपनी गाड़ी से जाते हैं, वहाँ से गुज़रते हुए आपको अधिक सोचना नहीं पड़ता, जैसे गाड़ी अपनेआप उस दिशा में चलती चली जाती है। कुछ ऐसा ही ध्यान देने की आदत का है। यदि आप हर छोटी-बड़ी चीज़ को ध्यान से करते हैं, कोई कुछ कह रहा हो तो उसे ध्यान लगाकर सुनते हैं, ध्यान से पढ़ते हैं तो ध्यान देना आपकी आदत का हिस्सा बन जाता है। तब आप इस ओर भी ध्यान देने लगते हैं कि आपका ध्यान कहाँ लग रहा है और अनावश्यक बातों से अपना ध्यान कैसे हटा लेना है। जो आपके जीवन के सर्वोत्तम और उच्च लक्ष्य को पाने में बाधक हो उसे छोड़ देने में समझदारी होती है। ध्यान आपको ज्ञान देता है कि आप विवेक को कैसे पा सकते हैं। तब पहला विवेकपूर्ण विचार आपके मन में यही उ...

https://www.youtube.com/watch?v=WvXByuv7xG0&list=UUNAiLAogzUDdSKwCmF3kQMg&index=1

चित्र
 

असंभव कुछ भी नहीं

चित्र
 https://www.atarman.com/hi/post/asambhav-ko-sambhav-kaise-banayen असंभव कुछ भी नहीं 5 stars 4 stars 3 stars 2 stars 1 star 5 RATING  Swaraangi Sane   जीवन शैली    जनवरी 20, 2022      0   पठन सूची में जोड़ें नेपोलियन का बड़ा प्रसिद्ध वाक्य है कि  ‘असंभव’ शब्द मेरे शब्दकोश में है ही नहीं। अंग्रेज़ी में इसे इम्पॉसिबल स्पैलिंग के हिज्जे कर कहा जाता है ‘आई एम पॉसिबल’। असंभव चमत्कार जो बात नेपोलियन कह सकता है, वो हम और आप क्यों नहीं। हम और आप यानी कि हम सभी करोड़ों कोशिकाओं से बने स्वयं में ही असंभव चमत्कार हैं। जब हम स्वयं चमत्कार हैं तो शेष अन्य चमत्कारों को हम नकारते क्यों हैं? और हम ऐसा क्यों मान लेते हैं कि अमुक या तमुक हो ही नहीं सकता...चाहे तो कुछ भी हो सकता है, सब कुछ संभव है। आपने अब तक यह चयन किया था कि ऐसा नहीं हो सकता इसलिए वैसा नहीं हो रहा था,  जबकि आसमान को ज़मीन पर उतार लाने तक का माद्दा आपमें हैं, हममें है, हम सबमें है।  आप जो चाहते हैं उसे पा सकते हैं, बशर्ते आपका उस पर विश्वास हो। एक दिन में आप फलाँ...

जीवन की गाड़ी का ऐक्सलेटर

चित्र
  जीवन की गाड़ी का ऐक्सलेटर स्वरांगी साने    पृथ्वी पर प्रगत (विकसित) प्रजाति आकार ले रही है। उन्हें कैसे पहचाना जा सकेगा? उनके पास अत्याधुनिक तकनीक हैं या उन्होंने जीनियस आविष्कार कर लिए हैं। वे भविष्य की झलक देख सकते हैं। कुछ होने से पहले उसका अंदेशा लगा पाना उनके लिए आसान होता है। उन्हें पूर्वाभास हो जाता है और वे सक्षम होते हैं। इस प्रगत प्रजाति के बारे में कहा जा रहा है कि उनमें यह शारीरिक क्षमता होती है कि वे दूसरे की ऊर्जा प्रछाया को पहचान लेते हैं। दुनियाभर में इन गुणों से लबरेज लोग हैं। केवल इतना नहीं है कि हम उन्हें पहचान नहीं पाते बल्कि उन लोगों को भी इसका ज्ञान नहीं होता है कि उनमें यह क्षमता है। जब उन्हें पता ही नहीं होता तो उनमें और सामान्य लोगों में क्या अंतर है? तो वह अंतर यह है कि प्रगत प्रजाति के लोग कम उम्र से ही इन बातों को संज्ञान में लेने लगते हैं, महसूस करने लगते हैं और उस ओर ध्यान देने लगते हैं। हम यदि जीनियस आविष्कार, पूर्वाभास या भविष्य की झलक देख पाने की क्षमता को ऐसा कहें कि वह उनके डीएनए में ही होता है तब भी जब तक वे अपने डीएनए से सुसंगत नह...
चित्र
 
चित्र
 
चित्र
 

मुनिया की दुनिया किस्सा 11

  https://www.atarman.com/hi/ post/muniya-ki-duniya-kissa-11

https://www.youtube.com/watch?v=_r7jtWNtY0U&list=UUNAiLAogzUDdSKwCmF3kQMg&index=1

चित्र
 

https://www.classicalclaps.com/sanjay-mahajan-badwah-dolls/

चित्र
  https://www.classicalclaps. com/sanjay-mahajan-badwah- dolls/ संजय महाजन : सृजनात्मकता की चरैवेति + स्वरांगी साने, पुणे     January 8, 2022 हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, हर घटना के साथ सकारात्मकता और नकारात्मकता जुड़ी होती है यह आप पर निर्भर करता है कि आप किसी घटना को किस तरह देखते हैं, आधा गिलास भरा हुआ या आधा गिलास खाली, यह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। इस तरह की तमाम कहावतों, उदाहरणों को सही अर्थों में समझना है तो आपको बड़वाह के संजय महाजन से मिलना चाहिए। जब 22 मार्च 2020 को पूरे देश में लॉक डाउन लग गया था और हर कोई अपने घरों में कैद हो गया था तब छोटे से कस्बे के इस कलाकार ने अपनी सृजनात्मकता को ‘चरैवेति चरैवेति’ कहा। हम कहते हैं कि हम ईश्वर के हाथ के गुड्डा-गुड़िया हैं, और जैसे मानव प्रजाति ही ध्वस्त हो जाएगी यह ख़तरा मंडराने लगा था तब संजय महाजन ने अपने हाथों से गुड़ियों का एक नया संसार रच दिया। न केवल संसार रचा बल्कि उस संसार को नई उमंगों और उत्साह-ऊर्जा से भी भर दिया। महज़ इन दो सालों में उनकी 135 गुड़ियाओं ने मध्यप्रदेश जनजाति संग्रहालय में अपने लिए स्थान बना लिया...
चित्र
 

time stamp 9.09

 https://drive.google.com/file/d/1ln9sR9BCk__2gtv07iXrHjJO-37U7d5P/view

'साहित्य सुषमा' पत्रिका समूह द्वारा प्रकाशित *"साहित्य सुषमा" ई-पत्रिका* का नया तिमाही अंक (जनवरी फर-मार्च2022) इसमें यह कहानी पढ़ सकते हैं - अ लाइफ ऑफ वूमन इन इंडिया सीरीज से दोनों की हँसी

चित्र
  'साहित्य सुषमा' पत्रिका समूह द्वारा प्रकाशित *"साहित्य सुषमा" ई-पत्रिका* का नया तिमाही अंक (जनवरी फर-मार्च2022) नीचे दी गयी वेबसाइट पर अपलोड हो गया है। अब आप www.sahityasushma.com इस वेबसाइट पर यह नवीनतम अंक देख सकते है, पढ़ सकते है। इसमें यह कहानी पढ़ सकते हैं -  अ लाइफ ऑफ वूमन इन इंडिया  सीरीज से दोनों की हँसी स्वरांगी साने सुबह का समय था, प्रिया को अपने दो हाथ कम लग रहे थे, रसोई के काम जैसे ख़त्म ही नहीं होते हो...तभी दरवाज़े की घंटी बजी..इस समय कोई क्यों आया इस अनमने भाव से उसने दरवाज़ा खोला। सामने दोनों कंधों पर साड़ी का पल्लू लिये एक महिला और बच्चा खड़ा था। महिला की उम्र ज़्यादा नहीं थी, शायद उसके साथ आने वाला उसका कोई भाई हो...पर ये कौन है, क्यों आई है...जैसे सवाल प्रिया के मन में घूम रहे थे..उतने में वह महिला बोल पड़ी- किसी ने बताया आपको काम वाली बाई की ज़रूरत है। प्रिया ने हाँ में गर्दन हिलाई लेकिन फिर भी हैरान थी कि यह महिला कौन है, कपड़े वगैरह से तो किसी मध्यम वर्ग की महिला ही लग रही थी। उस महिला ने बताया – मेरा नाम शशिकला है और यह मेरा लड़का है आलोक...आठवीं में पढ़...