संदेश

नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'रंग संवाद' (नवम्बर 2021): टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्व विद्यालय, भोपाल की बहुप्रतिष्ठित पुरस्कृत सांस्कृतिक पत्रिका के नवंबर अंक में देखिये-बाँचिए और राय दीजिये। सादर.....

चित्र
  स्वरांगी साने   प्रातः या साँझ की बेला में सूर्य की किरणें नारंगी उजास बिखेर रही हैं, चारों ओर हरियाली है, पास से कोई झरना बह रहा है, कूंज-केलिन में राधा-गोपियाँ विहार कर रही हैं, कदंब तरु तले कृष्ण बाँसुरी बजा रहा है, कोई गंधर्व कहीं बैठ सामवेद की किसी ऋचा का गान कर रहा है...कितना मनोरम दृश्य होगा न यह।   उत्तर आधुनिक काल में इस तरह के दृश्य की कल्पना तक कर पाना दुरूह है। वैदिक काल में इस तरह का वातावरण रहा होगा और इसकी कल्पना बिल्कुल अभी बीती सदी तक की जा सकती थी जब भक्ति की स्वर लहरियों में ऐसा माहौल खड़ा कर देने की ताकत हुआ करती थी। ये वो दौर था जब घर-घर सुनी जाती ऑडियो कैसेट्स में अनूप जलोटा, नरेंद्र चंचल या लता मंगेशकर की गायिकी से भक्ति संगीत का सैलाब उमड़ता था। सुनने वाला शास्त्रीय संगीत का पुरोधा या मर्मज्ञ हो या न भी हो लेकिन तब भी जब अनूप जलोटा का गाया ‘मैय्या मोरी मैं नहीं माखन खायो’ या ‘जग में सुंदर है दो नाम’ या ‘जाना था गंगा पार’ या ‘मेरे मन में राम’, ‘ऐसी लागी लगन’...सुनाई पड़ जाता तो कौन मीरा होना नहीं चाहता होगा? सुरेश वाडेकर की ‘श्रीमन नारायण हरि...

Motivational: क्या लोग आपको पसंद नहीं करते?

 https://m-hindi.webdunia.com/my-blog/motivational-faith-positive-positivity-motivation-121112100031_1.html?amp=1

मुनिया की दुनिया किस्सा 8

 https://www.atarman.com/hi/post/muniya-ki-duniya-kissa-8 मुनिया की दुनिया 5 stars 4 stars 3 stars 2 stars 1 star 5 RATING,  Swaraangi Sane   कहानी-कविता संग्रह    नवम्बर 24, 2021      0     पठन सूची में जोड़ें किस्सा 8 एक खिड़की है और खिड़की के पार एक पेड़…उस पेड़ पर आने वाले कई पक्षी मुनिया उस दिन आई तो खिड़की की ओर उसकी पीठ थी..मेरा चेहरा खिड़की की तरफ़ था…जाहिर है मुझे खिड़की के पार का दिख रहा था, उसे नहीं। पत्तियों के खड़खड़ाने की आवाज़ हुई और उसने श्श्श किया फिर फुसफुसाकर बोली   कौन है मुझे तो दिख रहा था मैंने कहा कौआ है मुनिया- नहीं कबूतर है मैं- अरे कौआ है मुनिया – कबूतर है … कितना बड़ा पाठ उससे खेलते-खेलते मिल गया। उसकी पीठ थी पर वह मान रही थी कि कबूतर है, मैं देख रही थी, उसे कह रही थी कौआ है..पर वह मानने को तैयार नहीं थी।  यही करते हैं न हम..ईश्वर हमारे सामने खड़े हो हमें सत्य बता रहे होते हैं, तब भी हम सत्य की ओर पीठ करे खड़े रहते हैं और चाहते हैं कि ईश्वर वही कहे जो हम चाह रहे हैं .. वाह री मेरी मुनिया..तुम तो...

"your way of trust-अपने भरोसे की राह" https://www.jansatta.com/duniya-mere-aage/your-way-of-trust/1929463/lite/

चित्र
  अपने भरोसे की राह स्वरांगी साने जो काम करने से आप बोझिल होने लगते हैं या नीरसता आपको घेरने लगती है, ऐसे कामों से खुद का बचाव करें। संस्कृत का एक शब्द है क्षेत्र, हिंदी भाषा में इसका प्रयोग काम के क्षेत्र के संदर्भ में अधिक होता है, जबकि संस्कृत में इसका तात्पर्य खेत और मन से भी है। खेत-खलिहान की रक्षा के लिए जैसे मेढ़ बनाई जाती है वैसे ही अपने मन की रक्षा के लिए भी बाड़ खड़ी कर लें जो आपकी उन लोगों और स्थितियों से रक्षा करेगी, जिनसे आप परेशान हो जाते हैं, जिनके साथ व्यवहार के बाद आप खुद को एकदम खाली-खाली पाते हैं।   इसी तरह अंग्रेज़ी भाषा में ‘बिग बी’ मतलब बड़ा भाई होता है, वहाँ बड़े भाई से बहुत उम्मीदें होती हैं। अपने बड़े भाई आप खुद बन जाइए। आपके पीठ पीछे क्या हो रहा है, उसे लेकर सतर्क रहिए। जैसे वहाँ बिग बी का मतलब अंततोगत्वा रक्षक होता है, वैसे ही रक्षक बनिए। भारतीय संस्कृति में भाई को बहन की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है। हरेक अपनी रक्षा का दायित्व खुद ही क्यों न उठा ले!   तो उन स्थितियों को टटोलिए, जिनमें रहते हुए आप खुद को लुटा-पिटा पाते हैं। कौन-सी स्थितिय...

सारे खेल मन के ...

 https://www.atarman.com/hi/post/man-ke-khel सारे खेल मन के ... 5 stars 4 stars 3 stars 2 stars 1 star 5 RATING,   Swaraangi Sane   जीवन शैली    नवम्बर 22, 2021      0     पठन सूची में जोड़ें क्या आप अपने तार्किक और तर्कसंगत पक्ष को पहचानते हैं? इस सवाल को अतार्किक कहते हुए सिरे से खारिज मत कीजिए बल्कि इस विचार के साथ अपने स्वयं के तार्किक पहलू को अपनाइए।  जैसे ही आप खुद को तर्क की कसौटी पर रखते हैं आपको हर पहलू का तार्किक पक्ष नज़र आने लगता है।  तर्क और तार्किकता आपको नेतृत्व का गुण प्रदान करेगी, उसे स्वीकार कीजिए। सामाजिक-राजनैतिक, भावनात्मक-आर्थिक आप किसी भी पक्ष की बात कर लीजिए, नेतृत्व का सूखा हर जगह दिखता है।  नेतृत्व करने के लिए आवश्यक होता है कि आपके पास संबंधित विषय का पूरा ज्ञान हो, तभी आप नेतृत्व कर सकते हैं।  ज्ञान परिमार्जित कीजिए और अपने विचारों से दूसरों को भी दिशा दीजिए और उसके बाद पहल करने से डरिए नहीं। यदि आप चिंतित और डर की वजह से कुछ सोच नहीं पा रहे हैं तो उससे खुद को मुक्त ...

लोकमत समाचार के दिवाली अंक 2021 में कहानी लॉफिंग बुद्धा

चित्र
  लाफ़िंग बुद्धा स्वरांगी साने प्रिया के यहाँ फ़नीर्चर बनाने का काम चल रहा था। भावना ने संदर्भ दिया था। घर का मुख्य दरवाज़ा खुला ही था, बढ़ई-मिस्त्री दस बार भीतर-बाहर करते थे। ठक-ठक, खट-खट की आवाज़ें हो रही थीं। उनका घर जिस मोहल्ले में था वहाँ अभी भी पॉश कॉलोनी के संस्कार नहीं आए थे और आते-जाते लोग झाँककर देख जाते थे कि क्या काम चल रहा है, कहाँ तक हुआ है...प्रिया भी ‘आओ-जाओ घर तुम्हारा’ के बेफ़िक्री के भाव में रहती..कितनी बार वह अंदर के कमरे में ही रहती और बाहर कौन आकर देख गया, उसे पता ही नहीं चलता। ऐसे ही उस दिन वह अपने कमरे में बैठी कोई पत्रिका पढ़ रही थी कि भावना कमरे में आती दिखी। -     अरे तू कब आई? -     तेरा घर ऐसे ही खुला है, कोई भी आ जाए,मैं ही क्यों? -     आ जाए तो आ जाए, हाहाहाहा अतिथि देवो भव। -     और यदि कोई बदमाश आ गया तो! -     तूने बाहर चार-पाँच मिस्त्री काम पर लगा रखे हैं, उनके हाथ में आरी, हथौड़ी जैसे औजार हैं, किसकी हिम्मत है, ऐसे ही अंदर आने की। -     मिस्त्री मत ...