"your way of trust-अपने भरोसे की राह" https://www.jansatta.com/duniya-mere-aage/your-way-of-trust/1929463/lite/
अपने भरोसे की राह
स्वरांगी साने
जो काम करने से आप बोझिल
होने लगते हैं या नीरसता आपको घेरने लगती है, ऐसे कामों से खुद का बचाव करें। संस्कृत
का एक शब्द है क्षेत्र, हिंदी भाषा में इसका प्रयोग काम के क्षेत्र के संदर्भ में अधिक
होता है, जबकि संस्कृत में इसका तात्पर्य खेत और मन से भी है। खेत-खलिहान की रक्षा
के लिए जैसे मेढ़ बनाई जाती है वैसे ही अपने मन की रक्षा के लिए भी बाड़ खड़ी कर लें जो
आपकी उन लोगों और स्थितियों से रक्षा करेगी, जिनसे आप परेशान हो जाते हैं, जिनके साथ
व्यवहार के बाद आप खुद को एकदम खाली-खाली पाते हैं।
इसी तरह अंग्रेज़ी भाषा
में ‘बिग बी’ मतलब बड़ा भाई होता है, वहाँ बड़े भाई से बहुत उम्मीदें होती हैं। अपने
बड़े भाई आप खुद बन जाइए। आपके पीठ पीछे क्या हो रहा है, उसे लेकर सतर्क रहिए। जैसे
वहाँ बिग बी का मतलब अंततोगत्वा रक्षक होता है, वैसे ही रक्षक बनिए। भारतीय संस्कृति
में भाई को बहन की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है। हरेक अपनी रक्षा का दायित्व खुद
ही क्यों न उठा ले!
तो उन स्थितियों को
टटोलिए, जिनमें रहते हुए आप खुद को लुटा-पिटा पाते हैं। कौन-सी स्थितियाँ हैं जो आपको
क्षण भर में थका देती हैं, आपकी सारी ऊर्जा का दोहन कर लेती हैं, अपने आपकी रक्षा के
लिए खुद को ही पुकारिए। यदि आप डर या भय पैदा करने वाली स्थितियों में होते हैं, उसका
असर आपके पूरे जीवन पर पड़ने लगता है। ऐसे कुछ स्थान, लोग और चीज़ें हो सकती हैं, जिनसे
अब आपको निज़ात पाने की ज़रूरत है। जो आपके लिए बेहतर नहीं, उन्हें अपने पाले में न रखिए
याकि उनसे पाला ही न पड़े ऐसी व्यवस्था कीजिए। आपको हमेशा संघर्षरत रहने की ज़रूरत नहीं
है। ‘ये बेचारा काम के बोझ का मारा’, यह वाक्प्रचार आपके हिस्से में आता हो तो एक बार
फिर सोचिए कि जो आप कर रहे हैं, उससे वास्तव में आपको क्या हासिल होता है?
कई बार जब हमें दिशा
परिवर्तन करने की आवश्यकता होती है, जिससे हमारी दशा परिवर्तित हो सकती है तो ऐसे कुछ
गीत, संवाद,कहावत-मुहावरे आपको सुनाई देने लगते हैं। आप अपने आसपास कुछ ऐसा पढ़-देख
लेते हैं, जिससे आपको लगता है यह संदेश आपके लिए ही है। याद कीजिए कभी कोई मूवी या
वीडियो या धारावाहिक या सीरीज़ देखते हुए उसका कोई एक संवाद या एक दृश्य आपके मन-मस्तिष्क
में कौंध जाता है। उसे अपने लिए प्रकृति की ओर से मिलने वाला संकेत समझिए और उस पर
मनन कीजिए। हो सकता है उन वाक्प्रचारों से आपको एक तरह की हिम्मत मिलती हो और वे बार-बार
आपको नज़र आते हों और आप उन्हें जितनी कोशिश कर लें तब भी नज़रअंदाज़ नहीं कर पाते हों
तो उन्हें नज़रअंदाज करने की फ़िराक में भी मत पड़िए, देखिए बिना कुछ कहे भी कोई कुदरती
शक्ति आपसे क्या कहना चाह रही है।
यदि आप उस आवाज़ को सुन
लेंगे तो अमल कर पाएँगे तो देखिएगा आपको कितना सुकून मिलेगा। हो सकता है आप लगातार
परेशानी झेलते हुए उस परेशानी को अपनी आदत बना चुके हों। कई बार हमारे जीवन में कुछ
नया आता है तो हम उसका स्वागत करने से डरते हैं। यह अनजाने के प्रति भय होता है। इसका
सरल उदाहरण देखना चाहें तो समझिए कोई कीड़ा है और उससे कहा जा रहा है कि मृत्यु के बाद
तुम्हारा अगला जीवन राजा का है, तब भी वह मरना नहीं चाहेगा। वह गंदगी, कीचड़-बदबू में
पड़े-पड़े सड़ता रहेगा और उसे वही सबसे अच्छा भी लगेगा क्योंकि भविष्य के प्रति वह आशंकित
है। क्या ऐसा ही कुछ हम भी नहीं कर रहे होते? हम बदलाव से डरते हैं और हमारे आसपास
की नकारात्मक ऊर्जाएँ हमारे इस भय को और हवा देती हैं। वे हमें और डराती हैं कि पता
नहीं आगे क्या होगा, उससे तो जो है, जैसा है, वही भला है।
इस डर से छुटकारा पाने
की निरंतर कोशिश कीजिए। हो सकता है आपकी प्रतिष्ठा भी दाँव पर लग जाए लेकिन अपने सामने
उस कीड़े का उदाहरण रखिए, कीड़े को भी अपना जीवन और प्रतिष्ठा बड़ी प्यारी होती है और
वह राजा बनने पर मिलने वाली प्रतिष्ठा को भी नकार देता है। अपने भीतर के बड़े भाई की
सलाह मानिए। उन स्थितियों से नाता तोड़िए जो आपको हैरान-परेशान कर देती हैं। अपने लिए
स्वस्थ सीमा रेखा बनाइए और व्यर्थ के मोह-प्रमाद को खुद से दूर कर दीजिए। हो सकता है
जब आप एक स्वस्थ सीमा रेखा खींच दें तो वे परिस्थितियाँ, लोग खुद ही आपसे दूर हो जाएँ।
कुछ समय के लिए आपको खालीपन लग सकता है। उस खालीपन को भी महसूस कीजिए। रीते पोखर ही
वर्षा के जल से भरा करते हैं, जो पहले से भरे हों, उन पहाड़ों पर पानी नहीं टिकता है।
हम नकारात्मकता और परेशानियों
के बीच जीने के लिए नहीं बने हैं। खुद की मदद कीजिए। उसके बाद आपके करियर, रिश्ते और
सोच पर भी देखिए कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। महाभारत के युद्ध के समय श्रीमद्भागवत
गीता का उपदेश देते हुए श्रीकृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था कि जहाँ-जहाँ अर्जुन है,
वहाँ-वहाँ कृष्ण है, मतलब जब-जब आप खुद को उलझनों में पाएँ, अपने भीतर के कृष्ण को
जगाइए, आपको उत्तर अवश्य मिलेंगे। अपने जीवन को ईर्ष्या-द्वेष, मत्सर-अहंकार से नहीं,
प्यार से सराबोर कर लीजिए।
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