मुनिया की दुनिया किस्सा 7

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मुनिया की दुनिया


किस्सा 7

उस दिन वह आई…

वैसे ही दरवाज़ा खोलते ही सीधे भीतर और खाट के नीचे जा छिपी…मैंने उसे देखा…मैंने उसे आते देखा..उसे खाट के नीचे जाते देखा..छिपते देखा…

तब भी वह बोली मुझे ढूँढो, मैं कहाँ हूँ

मैं झुक गई और खाट के नीचे उससे आँखें दो-चार हुई..तो..वह बोल उठी…ऐसे नहीं, यहाँ नहीं ढूँढना मुझे, बाकी जगह ढूँढो

मैं उसे बाकी जगह ढूँढने लगी..यह जानते हुए भी कि वह खाट के नीचे है..मैं परदे के पीछे देखने लगी, किवाड़ की ओट में, खिड़की के पास, बरामदे में…कहाँ हो..कहाँ हो…

तब मुनिया जी बोलीं – मैं खाट के नीचे हूँ, मुझे ढूँढो…

मैंने भी ऐसी खुशी दिखाई कि जैसे खजाना मिल गया…और उसे ढूँढ लिया…

पर मुनिया से एक और छोटी पड़ोसन चुनिया है…महज़ डेढ़ साल की..उसका तो खेल ही अजब।

उसे जहाँ जाने से मना करो…वह वहाँ जाती है…और खुद की आँखें बंद कर लेती है। उसे लगता है कि उसने आँखें बंद कर ली मतलब कोई उसे नहीं देख पा रहा…अजब

(क्रमशः)

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