स्वरांगी साने के कविता संग्रह और उनकी रचनाओं की मार्मिक अनुभूतियों पर विजय कुमार मल्होत्रा की समीक्षा रिपोर्ट

 जब भी उससे पूछा जाता है, ‘कैसी हो’ तो वह हँस देती है। पूछते हैं उससे-इसमें हँसने की क्या बात ! हाँ हँसने वाली कोई बात नहीं होती..दर असल वह रोना चाहती है और सब कहते हैं ‘वह हँसती बहुत है’।... पढ़िये स्वरांगी साने के कविता संग्रह और उनकी रचनाओं की मार्मिक अनुभूतियों पर विजय कुमार मल्होत्रा की समीक्षा रिपोर्ट।


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